सामग्री-1 कप चना दाल1/2 चम्मच जीरा1/2 सौंफ2 सूखी लाल मिर्च1 दालचीनी1 बारीक प्याज5-6 पुदीना पत्ते5-6 करी पत्ता2 हरी मिर्च1 चम्मच अदरक लहसुन पेस्टनमक स्वादानुसारतलने के लिए तेल
बनाने का तरीका-सबसे पहले 1 कप चना दाल को अच्छी तरह धोकर कम से कम 20 मिनट के लिए भिगोकर रखें। इसके बाद सारा पानी निकालकर उसे 30 मिनट के लिए अलग रख दें। अब ब्लेंडर में जीरा, सौंफ, सूखी लाल मिर्च, दालचीनी डालकर दरदरा पीस कर लें।
अलग रखी दाल में से 2 चम्मच दाल निकालकर अलग रखें और बाकी को ब्लेंडर में डालें। फिर इसमें नमक डालकर इसे भी पीस लें। ध्यान रखें कि आप इसे बहुत ज्यादा न पीस लें। इसका सही टेक्सचर तभी आएगा जब यह दरदरा पीसी जाएगी।
इसके बाद इसमें 2 चम्मच अलग रखी दाल भी मिला लें। अब इसमें बारीक कटा प्याज, बारीक कटा पुदीना और करी पत्ता, बारीक कटी हरी मिर्च, अदरक-लहसुन का पेस्ट और आखिर में तैयार मसाला डालें। इसमें 1 चम्मच कॉर्न फ्लोर डालें और सारी चीजों को अच्छी तरह से मिक्स करके बाइंड कर लें।
इसे अपने पसंद के हिसाब से आकार में बनाएं और 10 मिनट के लिए अलग रखें। अब एक कढ़ाही में तेल गर्म करें और उसमें यह तैयार वड़ा डालकर सुनहरा भूरा होने तक फ्राई कर लें।आपका मसाला वड़ा तैयार है, हरी चटनी के साथ इसे सर्व करें।
राजस्थानी पारंपरिक रेसिपी मेथी दाना है, इसे मेथी का मीठा अचार भी कहा जाता है। मेथी की लौंग स्वादिष्ट होने के साथ पाचन में भी बहुत फायदेमंद है। इसे पूरे परांठे के साथ परोसा जा सकता है।
फालूदा आइसक्रीम देशी कुल्फी और गुलाब की चाशनी के साथ बनाई जाती है, जो मई-जून जैसी गर्मियों में भी राहत देती है। इस फालूदा में हमने सबजा के बीजों का इस्तेमाल किया है, जिन्हें तुकमलंगा और स्वीट बेसिल भी कहा जाता है। साबजा के बीज गर्मी में लाभ प्रदान करते हैं, साथ ही पेट के कई रोगों जैसे कब्ज, पेट की जलन में भी लाभ पहुंचाते हैं।
इस व्यंजन को 6 सर्विंग्स के लिए अनुकूलित किया गया है। मात्रा और समय को अलग-अलग करने की आवश्यकता हो सकती है। यहां आप समायोजित हिस्से के आकार के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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